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Bihar Politics: काम्या मिश्रा की संजय झा से मुलाकात के बाद चर्चा तेज, जानिए राजनीति में कितने सफल रहे पूर्व IPS अधिकारी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पूर्व IPS काम्या मिश्रा की संजय झा से मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। जानिए सुनील कुमार, आनंद मिश्रा, शिवदीप लांडे समेत पूर्व IPS अधिकारियों का राजनीतिक सफर।

7 नवंबर 2026 | Alam Ki Khabar


बिहार की राजनीति में पूर्व आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा की एक मुलाकात ने नई बहस छेड़ दी है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से उनकी मुलाकात के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या पुलिस सेवा छोड़ चुकीं ‘लेडी सिंघम’ अब राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रही हैं? हालांकि, अभी तक काम्या मिश्रा की ओर से किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


दरअसल, शुक्रवार 6 नवंबर को काम्या मिश्रा ने पटना में संजय झा से मुलाकात की। दोनों की ओर से इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं। संजय झा ने इसे दीपावली की शुभकामनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ी शिष्टाचार भेंट बताया। इसके बावजूद मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।


कौन हैं काम्या मिश्रा, क्यों चर्चा में है उनका नाम?


काम्या मिश्रा 2019 बैच की बिहार कैडर की पूर्व आईपीएस अधिकारी रही हैं। दरभंगा ग्रामीण एसपी के रूप में काम करते हुए उनकी पहचान एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी की बनी थी। इसी दौरान उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी जाना जाने लगा।


अगस्त 2024 में उन्होंने आईपीएस सेवा से इस्तीफा दिया था, जिसे मार्च 2025 में मंजूरी मिली। पुलिस सेवा छोड़ने के बाद अब संजय झा से उनकी मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। लेकिन फिलहाल उनकी राजनीतिक पारी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।


सुनील कुमार: IPS से शिक्षा मंत्री और फिर विधायक


बिहार में पुलिस सेवा से राजनीति में आने वाले सफल चेहरों में सुनील कुमार का नाम प्रमुख है। 1987 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार पटना के एसएसपी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जेडीयू का दामन थामा।


2020 में गोपालगंज जिले की भोरे विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने और बिहार सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। पुलिस सेवा से निकलकर लगातार चुनावी सफलता हासिल करने वाले नेताओं में उनका नाम खास है।


आनंद मिश्रा: निर्दलीय से भाजपा तक का सफर


आनंद मिश्रा असम-मेघालय कैडर के 2011 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। पुलिस सेवा के दौरान असम और मेघालय में उनकी पहचान सख्त पुलिसिंग के लिए बनी। जनवरी 2024 में उन्होंने सेवा छोड़कर राजनीति में आने का फैसला किया।


2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बक्सर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में जन सुराज से जुड़ने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बक्सर से मैदान में उतरे और कांग्रेस प्रत्याशी को 28 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराकर विधायक बने।


शिवदीप लांडे: लोकप्रियता के बावजूद नहीं मिली चुनावी जीत


बिहार के चर्चित पूर्व आईपीएस अधिकारियों में शिवदीप वामनराव लांडे का नाम भी शामिल है। 2006 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी रहे लांडे को उनकी सख्त कार्यशैली के कारण ‘सिंघम’ और ‘सुपरकॉप’ कहा जाता था।


सितंबर 2024 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में आने का फैसला किया। अप्रैल 2025 में उन्होंने हिंदू सेना नाम से अपना राजनीतिक संगठन बनाया। 2025 के विधानसभा चुनाव में जमालपुर और अररिया सीटों से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों जगह जीत हासिल नहीं कर सके। जमालपुर में वह तीसरे स्थान पर रहे।


गुप्तेश्वर पांडेय: राजनीति में आए, लेकिन नहीं मिला चुनाव लड़ने का मौका


बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय भी पुलिस सेवा से राजनीति में आने वाले चर्चित चेहरों में रहे हैं। 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी पांडेय ने 2020 में वीआरएस लेकर जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की थी।


उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी भी चर्चा में रही, लेकिन सीटों के बंटवारे के कारण उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बना ली और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रुख किया।


राकेश कुमार मिश्रा: जन सुराज के टिकट पर चुनावी मैदान में


पूर्व आईपीएस अधिकारी राकेश कुमार मिश्रा ने भी राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई। आईआईटी बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले मिश्रा 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और वरिष्ठ पुलिस पदों पर काम कर चुके हैं।


उन्होंने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा सीट से प्रत्याशी बने, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली और वह तीसरे स्थान पर रहे।


जय प्रकाश सिंह: हिमाचल कैडर से बिहार की राजनीति तक


जय प्रकाश सिंह हिमाचल प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं। पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने जन सुराज का साथ पकड़ा। 2025 के विधानसभा चुनाव में छपरा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।


बीके रवि: रोसड़ा में कांग्रेस के टिकट पर आजमाई किस्मत


बिहार के समस्तीपुर जिले से संबंध रखने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी ब्रज किशोर रवि यानी बीके रवि भी राजनीति में उतरे। तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी रहे रवि ने 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रोसड़ा सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें भाजपा प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा और वह दूसरे स्थान पर रहे।


डीपी ओझा और आशीष रंजन सिन्हा भी रहे राजनीतिक चर्चा में


बिहार के पूर्व डीजीपी डीपी ओझा अपनी सख्त पुलिसिंग और बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई के लिए चर्चित रहे। उन्होंने 2004 में बेगूसराय से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। अब उनका निधन हो चुका है।


वहीं, बिहार के पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा ने सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में कदम रखा। उन्होंने राजद और बाद में कांग्रेस के साथ राजनीतिक सफर तय किया। 2014 में नालंदा से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली।


निखिल कुमार और ललित विजय सिंह राजनीति में रहे सफल


पूर्व आईपीएस अधिकारियों की राजनीतिक सफलता की चर्चा में निखिल कुमार और ललित विजय सिंह जैसे नाम भी शामिल हैं। निखिल कुमार दिल्ली पुलिस आयुक्त रहे और कांग्रेस के टिकट पर औरंगाबाद से सांसद बने। बाद में उन्हें राज्यपाल की जिम्मेदारी भी मिली।


ललित विजय सिंह भी पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे। वह बेगूसराय से सांसद निर्वाचित हुए और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बने। इन दोनों के राजनीतिक सफर को प्रशासनिक सेवा से राजनीति में सफल बदलाव के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।


2025 के चुनाव ने दिखाया लोकप्रियता और जीत में अंतर


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक ताकत आजमाई। सुनील कुमार और आनंद मिश्रा ने जीत दर्ज की, जबकि शिवदीप लांडे, राकेश कुमार मिश्रा, जय प्रकाश सिंह और बीके रवि को हार का सामना करना पड़ा।


इन चुनावी नतीजों से एक बात सामने आई कि पुलिस सेवा के दौरान बनी पहचान और लोकप्रियता अपने आप चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती। राजनीति में संगठन, पार्टी का आधार, स्थानीय समीकरण और मतदाताओं का भरोसा भी अहम भूमिका निभाते हैं।


अब काम्या मिश्रा की संजय झा से मुलाकात के बाद बिहार में एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कोई नया पूर्व आईपीएस चेहरा राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इस सवाल का जवाब फिलहाल काम्या मिश्रा की ओर से आने वाले किसी आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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